सनसनीखेज ब्रेकिंग : नोटबंदी के बाद एक और ऐतिहासिक फैसला ,मोदी सरकार अब नहीं देगी ‘आरक्षण’
नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट ने नोटबंदी के बाद आज एक और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को खत्म कर दिया है।
अब मोदी सरकार इसकी जगह एक नया आयोग बनाने जा रही है.मोदी सरकार के इस फैसले के बाद अब इसके लिए नेशनल कमीशन फॉर सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लासेस का गठन होगा। देश में ओबीसी कैटेगरी के लिए भी एससी-एसटी कमीशन के जैसे ही NSEBC का गठन किया जाएगा।
NSEBC एक संवैधानिक संस्था होती है। इसकी वजह से अब ओबीसी सूची में नई जाति का नाम जोड़ने अथवा हटाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। आज से पहले ऐसा नहीं होता था लेकिन अब इस फैसले के बाद ये जरूरी हो जायेगा
ये फैसला सरकार ने बहुत सोच समझ के लिया है मोदी सरकार ने यह फैसला जाट आरक्षण समेत देश में ओबीसी आरक्षण की अन्य मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया है। मोदी सरकार के फैसले के तहत संविधान में संशोधन कर पिछड़ा वर्ग आयोग की जगह नए आयोग का गठन किया जाएगा। केंद्र सरकार के मुताबिक सामाजिक शैक्षिक तौर पर पिछड़ों की नई परिभाषा बनाई जाएगी। मोदी सरकार ने यह फैसला पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की बढ़ती मांग को देखते हुए किया है।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों के लिए राष्ट्रीय कमीशन का गठन किया जाएगा। जिसके लिए संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 338B जोड़ा जाएगा। देश के अलग-अलग राज्यों में कई जातियां आरक्षण की मांग कर रही हैं, यही वजह है कि सरकार ने इस तरह का कड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के लागू होने के बाद आरक्षण देने का अधिकार अब संसद को होगा।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम 1993 से चला आ रहा है। जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में ये अधिनियम लागू है।इस आयोग का काम नागरिकों के किसी वर्ग के सूची में पिछडे़ वर्ग के रूप में शामिल किए जाने के अनुरोधों और शिकायतों की जांच करना है। साथ ही यह केंद्र सरकार को ऐसे सुझाव देता है जिसपर सरकार विचार कर सकती है। आयोग के पास देश के किसी हिस्से से किसी व्यक्ति को समन करने और दस्तावेज को पेश करने का अधिकार होता है। सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आयोग के अध्यक्ष होते हैं।
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| नरेन्द्र दामोरदास मोदी |
अब मोदी सरकार इसकी जगह एक नया आयोग बनाने जा रही है.मोदी सरकार के इस फैसले के बाद अब इसके लिए नेशनल कमीशन फॉर सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लासेस का गठन होगा। देश में ओबीसी कैटेगरी के लिए भी एससी-एसटी कमीशन के जैसे ही NSEBC का गठन किया जाएगा।
NSEBC एक संवैधानिक संस्था होती है। इसकी वजह से अब ओबीसी सूची में नई जाति का नाम जोड़ने अथवा हटाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। आज से पहले ऐसा नहीं होता था लेकिन अब इस फैसले के बाद ये जरूरी हो जायेगा
ये फैसला सरकार ने बहुत सोच समझ के लिया है मोदी सरकार ने यह फैसला जाट आरक्षण समेत देश में ओबीसी आरक्षण की अन्य मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया है। मोदी सरकार के फैसले के तहत संविधान में संशोधन कर पिछड़ा वर्ग आयोग की जगह नए आयोग का गठन किया जाएगा। केंद्र सरकार के मुताबिक सामाजिक शैक्षिक तौर पर पिछड़ों की नई परिभाषा बनाई जाएगी। मोदी सरकार ने यह फैसला पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की बढ़ती मांग को देखते हुए किया है।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों के लिए राष्ट्रीय कमीशन का गठन किया जाएगा। जिसके लिए संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 338B जोड़ा जाएगा। देश के अलग-अलग राज्यों में कई जातियां आरक्षण की मांग कर रही हैं, यही वजह है कि सरकार ने इस तरह का कड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के लागू होने के बाद आरक्षण देने का अधिकार अब संसद को होगा।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम 1993 से चला आ रहा है। जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में ये अधिनियम लागू है।इस आयोग का काम नागरिकों के किसी वर्ग के सूची में पिछडे़ वर्ग के रूप में शामिल किए जाने के अनुरोधों और शिकायतों की जांच करना है। साथ ही यह केंद्र सरकार को ऐसे सुझाव देता है जिसपर सरकार विचार कर सकती है। आयोग के पास देश के किसी हिस्से से किसी व्यक्ति को समन करने और दस्तावेज को पेश करने का अधिकार होता है। सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आयोग के अध्यक्ष होते हैं।

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