आतंकियों ने जब बच्चियों के साथ बलात्कार के साथ साथ इस घिनौना काम को दिया अंजाम..
आज हम आपको एक ऐसे नरसंहार की कहानी बताने जा रहे है, जिसे सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगें..दुनिया का कौन सा ऐसा मजहब है, जो अपने उपासकों को कथित ‘‘मजहबी दायित्व’’ पूरा करने के लिए हिंसा और रक्तपात की प्रेरणा देता है ? लेकिन इस्लाम में जो काफिर और कुफ्र की मान्यता है, उसके कारण उसके मानने वालों में एक वर्ग ऐसा भी है, जो जिहाद के बूते दुसरे धर्म को मानने वाले को इस्लाम के निचे लाना अपना अपना सबसे बड़ा दायित्व मानते है..और यहीं से होतीं है जिहादी मानसिकता की शुरुआत…
यहीं है वो मानसिकता जो इंसान के अंदर से इंसानियत को खत्म कर उसे हैवान बना देता है, तब वो कैसा भी कृत कर सकता है, क्योंकि उसके लिए हैवानियत का कोई पैमाना नहीं रह जाता. ये जेहादी आतंकी की नीचता किस हद तक जा सकतीं है, वो आज हम आपको बतायेंगे. ये घटना रूस के एक शहर “बेसलान” में, बच्चो के एक स्कूल पर हुआ यह “जेहादी हमला”, दुनिया का सबसे बड़ा. क्रूर और दिल दहलाने वाला नरसंहार था.
मासूम बच्चो के साथ किये गया यह “सेक्शुअल नरसंहार” इतना शर्मनाक और दर्दनाक था. कि पूरी दुनिया सन्न रह गयी थी. स्कूल पर हुआ यह “जेहादी” हमला “बेसलान स्कूल क्राइसेस” के नाम से कुख्यात है. 1 सितम्बर 2004 को “बेसलान” के एक स्कुल में, कुछ इस्लामी आतंकवादी अचानक घुस गए और घुसते ही पुरुषों का मार दिया, ताकि किसी तरह के प्रतिरोध की संभावना ना रहे.
ये जेहादी आतंकी, आतंकवाद से भी ज़्यादा दरिंदगी दिखना चाहते थे स्कूल में 4 से 12 साल तक के बच्चे थे. वो जेहादी उन सभी बच्चियों को स्कूल के जिम हॉल में ले गये. इसके बाद बच्चों की चीखती आवाज़ें इनके ज़ुल्म के आगे दब कर रह गयी. बारी बारी से 3 से 6 साल की एक एक बच्ची के साथ, कई कई आतंकवादियों ने बलात्कार किया.
इन हैवानों ने न सिर्फ बलात्कार किया बल्कि बच्चों के गुप्तांगों में अपने बंदूक और अन्य वस्तुओं को घुसेड़ा और दूसरे सारे बंधक बच्चों को ये सब देखने को मजबूर किया गया. जितना बच्चों से खून निकलता, ये हैवान उतनी ही ज़ोर जोर से ठहाके लगा कर हसते थे. बहुत सारी छोटी छोटी बच्चियां, ब्लीडिंग और दर्द की वजह से उसी समय मर गयी. हथियार के गुप्तांगों में डालने के वजह से, हथियार भी खून से सन गये थे.
इस सब से भी उन जालिमो का जी नहीं भरा तो उन छोटे-छोटे बच्चों को बुरी तरह पीटा भी. जेहादियों ने मासूम बच्चों को खूब लहू लुहान किया और खूब ठहाके लगाए . जैसे-जैसे समय बीता उनके ज़ुल्म और बढ़ते गये. बच्चों के पानी मांगने पर पानी की जगह, अपना पेशाब पीने पर मजबूर किया.
आतंकवादियों के द्वारा बच्चियों को तडपाने का खेल जारी रहा. अब उन्होंने बच्चियों के सामने पानी के बर्तन को रख दिया और कहा जो इसको पीने आएगा उसको मैं गोली मार दूँगा. इसके बाद डरे, सहमे बच्चियों में मौत का खौफ़ समा गया. छोटी छोटी बच्ची जो भूखी प्यासी थी डर कर चिल्ला भी नही पा रही थी, क्योंकि ऐसा करने पर उनको मारा पीटा जाता. अब तक स्कूल के बाहर भीड़ लग चुकी थी.
आतंकी अंदर से खड़े हो कर नगरवासियों पर कॉमेंट करते हुए अंडे फेंकते और हँसते थे. बच्चों के उपर इनकी क्रूरता लगातार जारी रही. रात को जेहादियों ने इन्ही मजबूर मासूम बच्चियों से कहा कि वो खून से सनी हुईं मरी बच्चियों बलात्कार के शिकार बच्चों की लाशों को, घसीटकर पीछे फेंक कर आयें. सोचिये वो समय कितना भयावह होगा जब अपने ही दोस्तों की लाशो को बाहर फेकने गईं होंगीं..
इस बीच रशियन सैनिकों ने स्कूल को घेर लिया और पहले उनसे समझौते की कोशिशें की जिससे बच्चों को बचाया जा सके. आतंकियों ने साफ कर दिया था कि अगर गैस का इस्तेमाल हुआ या बिजली काटी गयी तो वो तुरंत बच्चों को मार देंगे. इस बीच रूस की स्पेशल फाॅर्स “Alpha and Vympel” आ चुकी थी. रूसी विशेष बलों ने विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हुए स्कूल पर हमला कर दिया. इस हमले में टैंक, बंदूक, बम, राकेट्स , सभी इस्तेमाल किये गए.
स्पेशल फोर्स के कमांडोज ने अपनी जान पर खेल कर हमला किया लेकिन उस अभागे दिन सिर्फ़ रक्तपात के सिवा कुछ भी हासिल नही हो पाया. 334 लोग मारे गये, जिस मे से 186 छोटे-छोटे मासूम बच्चे थे, 247 बच्चे जो गंभीर रूप से घायल थे..एक बार गूगल पर जाकर “beslan school hostage crisis” लिखकर सर्च करना चाहिए, उस घटना का विवरण और चित्र देखकर समझ आजाएगा कि ये जेहादी आतंकी की नीचता की किस हद तक जा सकते हैं...
यहीं है वो मानसिकता जो इंसान के अंदर से इंसानियत को खत्म कर उसे हैवान बना देता है, तब वो कैसा भी कृत कर सकता है, क्योंकि उसके लिए हैवानियत का कोई पैमाना नहीं रह जाता. ये जेहादी आतंकी की नीचता किस हद तक जा सकतीं है, वो आज हम आपको बतायेंगे. ये घटना रूस के एक शहर “बेसलान” में, बच्चो के एक स्कूल पर हुआ यह “जेहादी हमला”, दुनिया का सबसे बड़ा. क्रूर और दिल दहलाने वाला नरसंहार था.
मासूम बच्चो के साथ किये गया यह “सेक्शुअल नरसंहार” इतना शर्मनाक और दर्दनाक था. कि पूरी दुनिया सन्न रह गयी थी. स्कूल पर हुआ यह “जेहादी” हमला “बेसलान स्कूल क्राइसेस” के नाम से कुख्यात है. 1 सितम्बर 2004 को “बेसलान” के एक स्कुल में, कुछ इस्लामी आतंकवादी अचानक घुस गए और घुसते ही पुरुषों का मार दिया, ताकि किसी तरह के प्रतिरोध की संभावना ना रहे.
ये जेहादी आतंकी, आतंकवाद से भी ज़्यादा दरिंदगी दिखना चाहते थे स्कूल में 4 से 12 साल तक के बच्चे थे. वो जेहादी उन सभी बच्चियों को स्कूल के जिम हॉल में ले गये. इसके बाद बच्चों की चीखती आवाज़ें इनके ज़ुल्म के आगे दब कर रह गयी. बारी बारी से 3 से 6 साल की एक एक बच्ची के साथ, कई कई आतंकवादियों ने बलात्कार किया.
इन हैवानों ने न सिर्फ बलात्कार किया बल्कि बच्चों के गुप्तांगों में अपने बंदूक और अन्य वस्तुओं को घुसेड़ा और दूसरे सारे बंधक बच्चों को ये सब देखने को मजबूर किया गया. जितना बच्चों से खून निकलता, ये हैवान उतनी ही ज़ोर जोर से ठहाके लगा कर हसते थे. बहुत सारी छोटी छोटी बच्चियां, ब्लीडिंग और दर्द की वजह से उसी समय मर गयी. हथियार के गुप्तांगों में डालने के वजह से, हथियार भी खून से सन गये थे.
इस सब से भी उन जालिमो का जी नहीं भरा तो उन छोटे-छोटे बच्चों को बुरी तरह पीटा भी. जेहादियों ने मासूम बच्चों को खूब लहू लुहान किया और खूब ठहाके लगाए . जैसे-जैसे समय बीता उनके ज़ुल्म और बढ़ते गये. बच्चों के पानी मांगने पर पानी की जगह, अपना पेशाब पीने पर मजबूर किया.
आतंकवादियों के द्वारा बच्चियों को तडपाने का खेल जारी रहा. अब उन्होंने बच्चियों के सामने पानी के बर्तन को रख दिया और कहा जो इसको पीने आएगा उसको मैं गोली मार दूँगा. इसके बाद डरे, सहमे बच्चियों में मौत का खौफ़ समा गया. छोटी छोटी बच्ची जो भूखी प्यासी थी डर कर चिल्ला भी नही पा रही थी, क्योंकि ऐसा करने पर उनको मारा पीटा जाता. अब तक स्कूल के बाहर भीड़ लग चुकी थी.
आतंकी अंदर से खड़े हो कर नगरवासियों पर कॉमेंट करते हुए अंडे फेंकते और हँसते थे. बच्चों के उपर इनकी क्रूरता लगातार जारी रही. रात को जेहादियों ने इन्ही मजबूर मासूम बच्चियों से कहा कि वो खून से सनी हुईं मरी बच्चियों बलात्कार के शिकार बच्चों की लाशों को, घसीटकर पीछे फेंक कर आयें. सोचिये वो समय कितना भयावह होगा जब अपने ही दोस्तों की लाशो को बाहर फेकने गईं होंगीं..
इस बीच रशियन सैनिकों ने स्कूल को घेर लिया और पहले उनसे समझौते की कोशिशें की जिससे बच्चों को बचाया जा सके. आतंकियों ने साफ कर दिया था कि अगर गैस का इस्तेमाल हुआ या बिजली काटी गयी तो वो तुरंत बच्चों को मार देंगे. इस बीच रूस की स्पेशल फाॅर्स “Alpha and Vympel” आ चुकी थी. रूसी विशेष बलों ने विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हुए स्कूल पर हमला कर दिया. इस हमले में टैंक, बंदूक, बम, राकेट्स , सभी इस्तेमाल किये गए.
स्पेशल फोर्स के कमांडोज ने अपनी जान पर खेल कर हमला किया लेकिन उस अभागे दिन सिर्फ़ रक्तपात के सिवा कुछ भी हासिल नही हो पाया. 334 लोग मारे गये, जिस मे से 186 छोटे-छोटे मासूम बच्चे थे, 247 बच्चे जो गंभीर रूप से घायल थे..एक बार गूगल पर जाकर “beslan school hostage crisis” लिखकर सर्च करना चाहिए, उस घटना का विवरण और चित्र देखकर समझ आजाएगा कि ये जेहादी आतंकी की नीचता की किस हद तक जा सकते हैं...





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